Quick summary

  • एनएसए अजीत डोभाल ने मॉस्को सुरक्षा मंच पर कहा कि आतंकवाद से लड़ाई में दोहरे मापदंड नहीं हो सकते।
  • उन्होंने अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले का जिक्र किया, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे।
  • उनका संदेश आतंकवादी समूहों, फाइनेंसरों और उन्हें समर्थन देने वालों की जवाबदेही पर केंद्रित था।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मॉस्को में हुए सुरक्षा मंच से भारत का यह संदेश दोहराया कि आतंकवाद को लेकर दुनिया का रवैया चुनिंदा नहीं हो सकता।

रिपोर्ट्स के मुताबिक डोभाल ने कहा कि हर देश की जिम्मेदारी है कि वह आतंकवाद से लड़े। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार देशों को यह तय करना होगा कि वे आतंकवाद को समर्थन देने वालों के साथ खड़े हैं या उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के साथ।

डोभाल ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया। इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे। भारतीय रिपोर्ट्स में द रेजिस्टेंस फ्रंट को इस हमले से जोड़ा गया है, जिसे पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी बताया गया है।

मॉस्को में डोभाल का मुख्य संदेश

डोभाल का जोर जवाबदेही पर था। उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। यह बात पहलगाम हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बयान की भाषा से भी मेल खाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने हमले के बाद निर्णायक कार्रवाई की। ये टिप्पणियां मॉस्को में 1st International Security Forum और XIV International Meeting of High-Ranking Officials Responsible for Security Matters के दौरान की गईं।

भारत के लिए यह क्यों अहम है

यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि भारत पहलगाम हमले को सिर्फ भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय मुद्दे के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद प्रायोजन के मुद्दे के रूप में उठाना चाहता है।

यह संदेश ऐसे समय आया है जब भारत रूस के साथ सुरक्षा सहयोग, ग्लोबल साउथ की भूमिका और आतंकवाद से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दबाव को साथ-साथ साधने की कोशिश कर रहा है।

Video context

Firstpost का लाइव वीडियो इस खबर के वीडियो संदर्भ के रूप में जोड़ा गया है। लेख में दिए गए मुख्य तथ्य नीचे दिए गए लिखित स्रोतों से मिलाए गए हैं।

अब आगे क्या देखना है

अब देखना होगा कि भारत का यह मॉस्को संदेश भविष्य के संयुक्त बयानों, BRICS या SCO सुरक्षा चर्चाओं और आतंक वित्तपोषण या प्रतिबंध सूचियों से जुड़ी कूटनीति में कितना दिखता है।

Sources and references

Why it matters

यह मुद्दा केवल एक भाषण का नहीं है। भारत आतंकवाद, उसके वित्तपोषण और प्रायोजन को वैश्विक सुरक्षा एजेंडा पर बनाए रखना चाहता है।

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